6.9.06

बिखर जाओ

बिखर जाओ तुम उन् पत्तों की तरह॥
जो पतझड़ में नए पत्तों की राह बन जाते है॥

बिखर जाओ तुम उन पेहली बूंदो की तरह
॥
जो खुद को खोकर जीवन की आस भरते है॥

बिखर जाओ तुम उस हसी की तरह
॥
जो गम में रहकर कुशियाँ बिखेरती है॥

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