Showing posts with label Love. Show all posts
Showing posts with label Love. Show all posts

29.8.07

जानू ना जानू

उलझे जवाबो की सुल्जी पहेली
मुस्कुराहट में छुपी नम सहेली
अधूरी बतों की बतें वोह करती
चुप चुप के हमसे वोह कुछ कहती
दिल में है रेहती सस्सों में है बसती
फिर भी आँखें हमेशा उसी है धून्डती

2.4.07

तरसते रहे

प्यार के बादल हमपे हमेशा बरसते रहे॥
फिर भी प्यार की एक बूँद के लिए तरसते रहे॥
भीग गए हम पुरे सिर से पैरो तक॥
फिर भी पिने के लिए तो तरसते रहे॥

31.12.06

क्या कहू मै इसे

मेरे जिन्दगी कि निगाहें तुम हो..
मेरे निगाहू कि ज़ुबान तुम हो..
मेरे ज़ुबां कि सासे तुम हो..
मेरे सासों कि धड़कन तुम हो...
मेरे धड़कन कि बतेँ तुम हो....
मेरे बातो कि वजह तुम हो...
मेरे वजह कि धारणा तुम हो...
मेरे धारणा का सच्चा आकर तुम हो...