31.12.06

क्या कहू मै इसे

मेरे जिन्दगी कि निगाहें तुम हो..
मेरे निगाहू कि ज़ुबान तुम हो..
मेरे ज़ुबां कि सासे तुम हो..
मेरे सासों कि धड़कन तुम हो...
मेरे धड़कन कि बतेँ तुम हो....
मेरे बातो कि वजह तुम हो...
मेरे वजह कि धारणा तुम हो...
मेरे धारणा का सच्चा आकर तुम हो...


6.9.06

पल पल

पल पल ने कहा एक पल से....
आज ने बदलते कल से...
नम होके साहिल ने बदल से...
और किसी मुसाफिर ने पेड के अच्चल से...
वजह तुम्हारी मैं या मेरी वजह तुम...
यह तो एक राज़ है॥
जिन्दगी का चलते रहना ही...
हमारा एक काज है..

किसी ना किसी के लिए तरसता...

ज़मीन कही सुखी है बादल कही बरसता है....
दुनिया में हर कोई किसी ना किसी के लिए तरसता है....
कोई मोहब्बत के लिए तो कोई मोहब्बत से तरसता है...
चीज़ खुद के पास ना हो उसी के लिए तरसता है...


टेढी लकीरे

हाथो की टेढी लकीरे भी धोका दे जाती है
लंबी होती है जिनकी जीवन रेखा, आयु उनहिकी कम होती है
किस्मत पे भरोसा रखने वाले जुआरी होते है...
जो जिन्दगी में हमेशा हारते ही रहते है...
वैसे किस्मत यारोँ कभी ना हतेली में होती है...
यह तो अपनी हिम्मत है जो कलाइं से लिखती है ...

बिखर जाओ

बिखर जाओ तुम उन् पत्तों की तरह
जो पतझड़ में नए पत्तों की राह बन जाते है

बिखर जाओ तुम उन पेहली बूंदो की तरह

जो खुद को खोकर जीवन की आस भरते है

बिखर जाओ तुम उस हसी की तरह

जो गम में रहकर कुशियाँ बिखेरती है