31.12.06

क्या कहू मै इसे

मेरे जिन्दगी कि निगाहें तुम हो..
मेरे निगाहू कि ज़ुबान तुम हो..
मेरे ज़ुबां कि सासे तुम हो..
मेरे सासों कि धड़कन तुम हो...
मेरे धड़कन कि बतेँ तुम हो....
मेरे बातो कि वजह तुम हो...
मेरे वजह कि धारणा तुम हो...
मेरे धारणा का सच्चा आकर तुम हो...


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